Thursday, 20 March 2014

राज़ है ये ज़िन्दगी का बस जीते चले जाओ...

जो चाहा कभी पाया नहीं
जो पाया कभी सोचा नहीं
जो सोचा कभी मिला नहीं
जो मिला रास आया आया नहीं
जो खोया वो याद आता है
पर
जो पाया संभाला जाता नहीं
क्यों
अजीब सी पहेली है ज़िन्दगी
जिसको कोई सुलझा पाता नहीं
जीवन में कभी समझौता करना पड़े तो कोई बड़ी बात नहीं है
क्योंकि
झुकता वही है जिसमें जान होती
अकड़ तो मुर्दे की पहचान होती है
ऐसा सुना और पढ़ा है मैंने
चेहरे की हॅसी से हर गम चुराओ, बहुत कुछ बोलो
पर कुछ न छुपाओ
खुद ना रूठो पर सबको मनाओ,
राज़ है ये ज़िन्दगी का बस जीते चले जाओ......

आपका 
कृष्णा नन्द राय

Saturday, 15 March 2014

पेट कि मारी जनता है साहब"


किसी ने सही कहा है कि यदि देश को जानना है तो पूरा देश घूमो, कम बोलो लोगो कि सुनो, उनको समझो, तभी जा के कुछ कह सकते हो लिख सकते हो और समझ सकते हो.. खैर मैं तो घुमा नहीं अधिक पर लोगो से बहुत मिलता हूँ, बाते करता हूँ उनकी सुनता हूँ, क्या करूँ काम ही ऐसा है, लोगो से बात करता हूँ उनको शो के लिए बुलाता हूँ, बहुत सारे सवाल होते है उनके मन में, जवाब ढूंढे जाते है कुछ सवाल के जवाब मिल जाते है कुछ के पहेली बन के रह जाते है.... कुछ लोग कहते है कि कितनी सरकार आती है और चली जाती है पर  हम वैसे के वैसे ही रह जाते है मुझे  एक फ़िल्म का डायलॉग याद आया " गरीबी , भुखमरी, बेकारी ये सब  कोई रंग जाती पूछ के वार नहीं करती, ये पेट कि मारी जनता है साहब झूटे वादे कर दो, एक रोटी का आसरा दे दो, किसी भी रंग का झंडा दे दो थाम लेगी...." जब भी ये फ़िल्म बनी होगी तब भी शायद लोग ऐसा ही  सोचते होंगे l बात भी बिलकुल सही है, इलेक्शन इनके लिए किसी लुभावने त्योहार से कम नहीं है जो हर पांच साल में आता रहता है.l
नेता लोगो का क्या वादे कर दिए, लोग ने वोट दे दिए, जित गए, उसके बाद तो वादे और इरादे दोनों ही गुम हो जाते उस त्योहार कि भीड़ में जो पाँच साल बाद ही आएगा, खैर क्या कर सकते है "पेट कि मारी जनता है साहब"
कुछ वादे मैं भी लिख देता हूँ जो आज कल रोड के साइड बड़े - बड़े बोर्ड पे लिखे होते है, बीजेपी लिखिति है- "बहुत हो गया भ्रष्टाचार, अब कि बार मोदी सरकार" ये सुनके पढ़ के एक समय के लिए ऐसा लगता है कि बस मोदी कि सरकार  आजाए, पर क्या मोदी भ्रष्टाचार को ख़त्म कर पाएंगे या नहीं ये तो आने के बाद ही पता चलेगा इसलिए अब कुछ कांग्रेस और दूसरी पार्टियों के समर्थक भी कह रहे है कि एक मौका मोदी को भी दे के देखते है, चलो कोई नहीं मौका देना कोई बुरी बात नहीं है पर आखिर कब तक किस - किस को मौका देते रहेंगे क्या हम  एक्सपेरिमेंट कर रहे है .? लोगो ने इसका जवाब दिया  एक्सपेरिमेंट नहीं  उम्मीद कर रहे है...!!!!!!  उम्मीद ये  उम्मीद भी न किसी पहेली से कम नहीं है खैर जो भी हो आगे कि बात करता हूँ...
कांग्रेस ने लिखा है एक नारे में " मैं नहीं हम " सही बात है पर ये तो साफ़ करिये कि "हम" लोग कौन है ? क्या ये हम का मतलब सिर्फ पैसे वाले लोग से है या वोट बैंक के कुछ आरक्षित लोग के लिए है .. और यदि ये "हम" गरीब लोगो के लिए है तो गरीबी इस देश से क्यों नहीं गयी ? क्यों गरीब के सामने ये वादे  किये जाते है जो पुरे नहीं किए जाते, पुरे इसलिए नाही किए जाते  क्यों कि यदि ये गरीब अमीर हो गये तो वोट कौन देगा..? इसलिए इलेक्शन के बाजार में जो मन आए वादे कर दिए जाते है ताकि ये गरीब उसकी  आशा में हमेसा रहे, और नेता लोग को वोट मिलते रहे...
इस चुनाव के बरात में एक नयी नवेली दुल्हन भी आयी है "आप" आम आदमी पार्टी जो झाड़ू चला  के सफाई कि बात करती है, लेकिन खुद एक शहर तो साफ़ हुआ नहीं देश को साफ़ करने कि बात करते है.. कहते है हमे मौका दीजिये, मौका दिया था छोड़ क्यों दिया.? सिर्फ जनलोकपाल बिल के लिए या इस इलेक्शन के लिए जो भी हो, "आप" के सामने तो सब झूठे है वही सच्ची है ईमानदार है क्यों कि हरिश्चंद्र से इनको सर्टिफिकेट मिला हुआ है न... पर इनको ये नहीं पता कि झाड़ू सफाई तो करता है पर रायता भी फैला देता है....
बहुत से लोगो को इन वादो से कुछ नहीं लेना देना, इन लोगो का कहना है कि हम सरकार से लाख या करोड़ नहीं मांग रहे बस एक ऐसी नौकरी दिला दे जिससे दो वक़्त कि रोटी नसीब हो जाए है.. क्या हमारी सरकार इतना भी नहीं कर सकती क्या ..? लोग कहते है कि सरकार किसी कि भी हो हमारी बस हमे रोज़ मरा ज़िन्दगी कि जरुरत पूरी हो जाए, और हमे कुछ नहीं चाहिए.. l
लोगो को घोटालों से कोई मतलब नहीं किसने कितना पैसा खाया, कोई मतलब नहीं, लोग ये कहते है कि जिस परीक्षा के लिए उन्होंने मेहनत कि दिन रात एक किया और आखिर में इतना सब करने के बाद  भी सेटिंग - वेटिंग से दुसरो को मौका मिल जाता है, क्यों..?
गांव में रहने वाले लोगो को वाई -फाई से क्या मतलब, बुलेट ट्रैन का क्या सपना देखना... जो उनकी जरुरत है वो तो मिले उन्हें... इस इलेक्शन के महाकुम्भ में  मोदी कि लहर हो या हाथ का साथ हो, या झाड़ू कि सचाई और इम्मानदारी हो या इन सब के वादे हो... सवाल ये उठता है कि इरादे किस के नेक है.? और वादे किसके पक्के है.. ? सोच लीजिये परख लीजिए फिर वोट दीजिएगा नहीं तो ये त्योहार पांच साल बाद ही आएगा..!!! देख लीजिए कहीं देर न हो जाए....
आपका 
कृष्णा नन्द राय

Wednesday, 12 March 2014

चले तो थे दोस्तों का काफिला लेकर ...

चले तो थे दोस्तों का काफिला लेकर ...
पर कुछ जुदा हो गए और कुछ
खुदा हो गए.....
कुछ गुमशुदा तो कुछ
शादीशुदा हो गए....

Sunday, 9 March 2014

राजनीती की दुनिया भी है बड़ी कमाल..........

राजनीती की दुनिया भी है बड़ी कमाल
महारथी करते है रोज धमाल ……
राहुल है नादाँ अभी, नहीं है उसको ज्ञान
पर करना चाहता है वह भी कुछ अच्छे से काम
गिनवा रहा उपलब्धियां, बस यही है उसका काम…….
कांग्रेस कि कमियों को बीजेपी ने बनाया ढाल
कला धन है स्विस बैंकों में और देश का बुरा हाल
लाऊंगा वापस इसको गर तुमने निभाया साथ
हाईटेक हो गया मोदी ,और लगा दी चाय चौपाल .
राजनीती की दुनिया भी है बड़ी कमाल…………………

आपका 
कृष्णा नन्द राय

Tuesday, 25 February 2014

माँ ! मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ....


घुटनों से रेंगते - रेंगते
कब पैरों पे खड़ा हुआ,
तेरी ममता के आँचल में
न जाने कब बड़ा हुआ,
सर पे काला टिका और दूध मलाई
आज भी वो यादे सब कुछ वैसी है,
मैं ही मैं हूँ हर जगह
प्यार ये तेरा कैसा है,
सीधा साधा भोला भाला,
मैं ही सबसे अच्छा हूँ,
कितना भी हो जाऊँ बड़ा
माँ ! मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ....
माँ ! मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ....

आपका 
कृष्णा नन्द राय

Saturday, 15 February 2014

केजरीवाल जी का 49 दिन का रिपोर्ट कार्ड.....




केजरीवाल जी आप से और आप की  "आप " पार्टी से आम लोगो को बहुत उमीद थी, आप ने ये क्या किया मुझे कुछ समझ नहीं आया, जब से आप की सरकार बनी है तब से कुछ न कुछ हर रोज़ आप किसी न किसी बात से खबर में रहते थे.... आप ने अपनी पूरी पार्टी को एक सर्कस खेल का केंद्र बना दिया था जहाँ  रोज़ नए सर्कस दिखाए जा रहे थे, कभी शपथ ग्रहण के समय तो कभी धरना के समय हर बात में धरना, ये मुझे सही नहीं लगता पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल जी l
केजरीवाल सरकार का 49 दिन का एक्शन, इमोशन, ड्रामा, धरना प्रदर्शन, वादे इतना सब कुछ देखा जनता ने वो भी इतने कम दिनों में वाह जी वाह ये सब सस्पेंस से भरी किसी फिल्म से कम नहीं रहा, पाँच साल रहते तो न जाने और कितने बदलाव होते और न जाने कितने धरने l सरकार के बनने के पहले दिन से  अभी तक ऐसा कोई भी  दिन नहीं  रहा, जब केजरीवाल जी और उनकी सरकार सुर्खियों में नहीं रही l कभी किसी सही बात को लेकर कभी गलत बात को लेकर l बात चाहे कुछ भी हो या सोमनाथ भारती की हो या राखी बिड़ला की, चाहे मुद्दा उपराज्यपाल को एजेंट कहने का हो, या गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस , कांग्रेस और बीजेपी से टकराव लेने की हो या खुले मैदान में कोई बिल पास करने की चाह इनके चलते सरकार हर दिन चर्चा में रही l
सरकार बनने से पहले ही विवाद शुरू हो गए थे, पार्टी के लक्ष्मी नगर से  विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने बगावत का सुर उठाया था, जब उन्हें कैबिनेट में जगह नहीं मिली, लेकिन पार्टी ने उन्हें किसी भी तरह मना लिया l शपथ ग्रहण समारोह जब हुआ इसके लिए केजरीवाल जी अपने मंत्रियों के साथ कौशांबी से मेट्रो में बैठकर राम लीला मैदान गए तो उनकी जैम कर वाहवाही हुई, लेकिन  जिन लोगो को इससे से दिकत हुई उसका क्या केजरीवाल जी..? पूरी मेट्रो तो आप के समर्थकों से भरी हुई थी..
शपथ लेने के कुछ ही देर बाद केजरीवाल जी ने कई बड़े अफसरों के तबादले कर डाले, लाल बत्ती के इस्तेमाल पर बैन लगाने का ऑर्डर पास कर डाला, वाह केजरीवाल जी बहुत खूब आचा काम किया आपने..
सरकारी घर लेने को लेकर केजरीवाल जी खासे विवाद में रहे, भगवानदास रोड पर बड़ा बंगला लेने को तैयार हो गए लेकिन विरोध के बाद उन्होंने फैसला टाल दिया l  इस दौरान उनकी सरकार के मंत्रियों द्वारा सरकारी गाड़ी लेने को लेकर भी सरकार सुर्खियों में रही l
केजरीवाल जी ने हर हफ्ते सचिवालय के बाहर जनता दरबार लगाने का प्लान बनाया, लेकिन एक दरबार में अफरातफरी मची तो केजरीवाल जी ये प्लान हमेशा के लिए टाल दिया l  भ्रष्टाचार हेल्पलाइन खोल के एक हद तक भ्रष्ट लोगो के मन में खौफ़ पैदा कर दिया, जिसे जनता ने खूब सराहा l
सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री राखी बिड़ला की की कार पर एक बच्चे की गेंद लगने से शीशा टुटा, तो उन्होंने एफआईआर दर्ज करवा दी, क्या आम लोग ऐसे ही करते है .? किसी बच्चे की गेंद से शीशा टूट जाये तो पुलिस शिकायत, आम लोग तो बच्चा समझ के माफ़ कर देते पर ये तो मंत्री थी न.... आम आदमी थोड़ी ही थी राखी जी,  चाहे ये कुछ भी बोले, केजरीवाल जी ने इस पे  भी बचाव किया था आखिर क्यों..?
सोमनाथ भारती ऐसे विवाद में पड़े की सरकार के आखिरी दिन तक वो निजात नहीं पा सके l सोमनाथ भारती अपने समर्थकों को साथ लेकर आधी रात को रेड डालने चले गए l इस दौरान कुछ अफ़्रीकी महिलाओं ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किए जाने और जबरन मेडिकल टेस्ट कराए जाने के आरोप लगाए l पुलिस से भी उनकी झड़प हुई , और सोमनाथ भारती घिरे, तो केजरीवाल खुद उनके बचाव में आ गए, लेकिन एक और आरोप सोमनाथ पे लगा की उन्होंने एक आरोपी को बचाने के लिए गवाह पर दबाव डालने की कोशिश की थी l
दिल्ली के कनॉट प्लेस में एक विदेशी महिला से हुए गैंग रेप को लेकर सरकार ने पुलिस और गृह मंत्रालय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, केजरीवाल जी ने रेल भवन के सामने धरना दिया, इस धरने के दौरान कई नाटकीय बात देखने को मिले l इतनी ठण्ड भरी रात में सीएम और उनके मंत्री रात को सड़क पर सोए l फिर उपराज्यपाल के आश्वासन के बाद रात को नाटकीय तरीके से धरना खत्म किया गया l
अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने का सरकार का वादा पूरा न होते देख स्कूलों के अस्थायी मास्टर , डीटीसी  के ड्राइवर-कंडक्टर  ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया रोज़ प्रदर्शन होने लगे... फिर सीएम ने आश्वासन दिया की जल्द ही हल निकाला जाएगा..
और अब अंत में जनलोकपाल बिल को पास कराने को लेकर अड़े केजरीवाल जी ने इश्तीफा दे दिया..
पर बहुत सारे सवाल मन में आ रहे है...
क्यों दिया इश्तीफा इसलिए क्यों की जनलोकपाल बिल पास न हो सका, या इसलिए दिया क्योकि लोक सभा इलेक्शन का बिगुल बज चूका है.. क्या सिर्फ एक जनलोकपाल बिल ही मुद्दा था लोगो का यदि था तो क्या इश्तीफा देना जी एक विकल्प था..? और यदि इश्तीफा देना ही था तो लोगो से जनमत संग्रह क्यों नहीं कराया..? जब सरकार बनानी थी तब लोगो से पूछा और जब सरकार से बाहर जाना था तो नहीं पूछा क्यों..? जब मन आए धरना देंगे उस समय लोगो से नहीं पूछा की धरना दे या नहीं ..?
यदि ये सब कुछ सही था तो आदरणीय केजरीवाल जी आप की "आप" पार्टी में और दूसरी पार्टी में क्या अंतर रह जाएगा..? जब मन आए आप के पार्टी के लोग  किसी पे नस्लभेद टिप्पणी कर देते है, किसी को एजेंट कह देते है, क्यों "आप" पार्टी को इमान्दारी का सर्टिफिकेट मिला है क्या ?
केजरीवाल जी  जवाब दीजिएगा इन सवालों का जब भी मौका मिले, खैर अब तो खाली ही है आप  और आप की  "आप" पार्टी भी...
आपका
कृष्णा नन्द राय 

Sunday, 9 February 2014

समझ नहीं पाता...!!!!!!

खिले फूलों को डाली से तोडा नहीं जाता
टुटा हुआ आइना फिर जोड़ा नहीं जाता,
बस्तियां चली जातीं हैं खुद ही उठकर
नदी कि धार को कभी मोड़ा नहीं जाता,
साथ रहते हैं कुछ लोग दूर रहके ताउम्र
दिल के रिश्तों को कभी तोडा नहीं जाता
यह दिल तोड़े जाते है बेदर्दी से यहाँ दोस्तों
पत्थरों को भी नफरत से तोडा नहीं जाता,
काँटा भी काँटा निकालने के काम आ जाता है
बुझे हुए चिरागों को भी कभी तोडा नहीं जाता,
छूट जाते हैं साथ गर्दिशों के तूफ़ान में अक्सर
जानबूझ के हाथो से हाथ कभी छोड़ा नहीं जाता,
जिनको आदत ही पद गयी हो अँधेरे में जीने कि
फिर उजालों से उनका रिश्ता जोड़ा नहीं जाता ...
कृष्णा तो हर मुद्दे पे लिखता रहता है
पता नहीं क्यों हर कोई उसे ठीक से समझ नहीं पाता...!!!!!!

कृष्णा नन्द राय