Thursday 10 May 2018

सोचिए एक बार..

घर का पड़ोसी अपनी बच्ची को अब आपके घर अकेले भेजते हुए कई बार सोचता है, बस में आपकी बगल की सीट पर मजबूरी से बैठी लड़की या औरत बस में एक छोटा सा झटका लगने से उसे गलती से छू जाने पर आधी सीट से ज्यादा का फासला कर के बैठती है और चोरी से आपकी आँखों में देखती है, कहीं वहशीपन का किड़ा तो नहीं बजबजा रहा.....
फेसबुक पर आपकी रिक्वेस्ट को लड़कियों द्वारा नकार दिया जाता है, ये सोच कर की आप उसका बलात्कार ही करोगे मैसेज में.....
आप किसी छोटी अंजान बच्ची को दुलार भी नही सकते खुलकर, यहाँ तक की हो सकता है आपके घर में भी आप पर शक्क कर लिया जाता हो......
माफ करिएगा पर यही तो होता है हर जगह और जो ऐसा करते हैं उनका करना जायज़ है।
कौन अपनी बच्ची का बेरहमी से बलात्कार होने दे और फिर न्याय के लिये कोर्ट के चक्कर काटे....
कौन रातों रात अखबार की सुर्खियों में अपनी और अपनी बच्ची की लुटती हुई इज़्जत देख कर तिल तिल मरे.....
पर मैं जानता हूँ आप इज़्जत करते हैं औरत की, पर इन सब घटनाओं के दौरान आपकी आत्मा कितनी दुखती है कोई समझ तक नही सकता बस इन वहशियों की वजह से आप भी उसी नज़र से देखे जाते हैं.....
अगर आपके साथ कोई बाप अपनी बेटी भेज कर सहज महसूस करता है तो आप समझिए आपने बहुत बड़ी उपलब्धि प्राप्त की है।
अगर आपकी दोस्त आप पर भरोसा कर रही है तो आप इस घिनौने समाज से हट कर हैं।
अगर फेसबुक का कोई अंजाना चेहरा आपकी इज्ज़त कर रहा है बिना डरे सब कह दे रहा है तो आपकी सोच वाकई में अच्छी है.....
अगर आपकी बहन जो एक लड़की है का दिल कह देता है के उसका भाई बहुत अच्छी सोच रखता है तो उसके यकीन को टूटने ना दें....
समाज का भार आपके कन्धों पर है ना चाहते हुए भी, मोहल्ले में भीषण आग लगी है तो आपका घर सुरक्षित रह जाए संभव नही इसलिये वो आग किसी और के ही घर क्यों ना लगी हो बुझाना आपका फर्ज़ बनता है....
ये बस फर्ज़ी बातें या एक ब्लॉग  ही नही ये बातें हैं जो आज कल हो रही है l
फर्क नही पड़ता आप ब्लॉग  को पसंद  करें या ना करें ज्ञान बाटें या ना बाटें, फर्क पड़ता है तो बस ये के मेरी बातों को समझने की कोशिश करें और अगर पहले से समझते हैं तो सलाम है आपकी सोच को..!
यह सिर्फ मुद्दा नहीं है ये सबका मुद्दा है, पर हाँ सोच मेरी है, हो सकता है आपकी भी येही सोच हो , और यदि आपकी सोच नहीं है तो सोचिए एक बार l

आपका ,
कृष्णा नन्द राय